
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन की नई संशोधित गाइडलाइन दरें जारी कर दी हैं, जिससे बहुमंजिला फ्लैट खरीदारों, दुकानदारों, किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। 20 नवंबर को लागू नई दरों पर आए सुझावों और आपत्तियों के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक हुई, जिसके बाद कई महत्वपूर्ण सुधारों को मंजूरी दी गई। संशोधित गाइडलाइन 8 दिसंबर से लागू हो गई है, जबकि जिले की मूल्यांकन समितियों को 31 दिसंबर 2025 तक नए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में भूखंडों के मूल्यांकन में बड़ा बदलाव करते हुए 1400 वर्गमीटर तक की इंक्रीमेंटल गणना को खत्म कर दिया है। अब नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों में पहले की तरह स्लैब आधारित दरें ही लागू होंगी। बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान और कार्यालयों की कीमत अब सुपर बिल्ट-अप एरिया पर नहीं बल्कि बिल्ट-अप एरिया के आधार पर तय की जाएगी। इससे फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आएगी और वर्टिकल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।
मल्टीस्टोरी और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए भी राहत दी गई है। बेसमेंट और प्रथम तल पर 10 प्रतिशत और दूसरे तल तथा उससे ऊपर के तल पर 20 प्रतिशत कम दर से मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट और दुकानें अधिक किफायती होंगी। इसके अलावा मुख्य मार्ग से 20 मीटर दूर स्थित कमर्शियल संपत्तियों के मूल्य में 25 प्रतिशत की कटौती का प्रावधान किया गया है।
गाइडलाइन में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए कई जनहितैषी सुधार किए गए हैं। नजूल, आबादी और परिवर्तित भूमि पर अब कृषि भूमि वाले नियम लागू होंगे, जिससे जमीन की कीमतों में भारी कमी आएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तित भूमि पर सिंचित भूमि का ढाई गुना मूल्य लगाने का नियम समाप्त कर दिया गया है। दो फसली भूमि, वाणिज्यिक फसलों, ट्यूबवेल-बोरवेल और कुओं पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क भी पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं।
भूमि पर लगे वृक्षों के मूल्य को अब भूमि दर में शामिल नहीं किया जाएगा। इससे न केवल रजिस्ट्री पर लगने वाला शुल्क कम होगा, बल्कि पेड़ों को काटकर मूल्यांकन कम कराने की प्रवृत्ति भी समाप्त होगी। शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में 37.5 डिसमिल तक की जमीन अब वर्गमीटर दर पर नहीं बल्कि हेक्टेयर दर से मूल्यांकित होगी, जिससे किसानों को भारी राहत मिलेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले शहरी क्षेत्रों में निर्मित संपत्तियों के लिए 21 अलग-अलग दरें लागू थीं, जिन्हें घटाकर अब केवल दो दरें कर दिया गया है। इससे आम लोगों को अपने संपत्ति का बाजार मूल्य समझने में आसानी होगी और पंजीयन प्रक्रिया सरल होगी।
नई गाइडलाइन दरों से आम नागरिकों, किसानों और संपत्ति खरीदने वालों पर आर्थिक दबाव कम होगा और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व सरल बनेगी।








