कवर्धा में देह व्यापार का भंडाफोड़, चकला संचालक अभिताभ नामदेव गिरफ्तार

कवर्धा। शहर के मजगांव रोड स्थित एक मकान में पुलिस दबिश के दौरान कथित रूप से देह व्यापार संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मकान मालिक अमिताभ नामदेव को हिरासत में लिया है, जो स्वयं को एक पत्रकार एवं न्यूज़ पोर्टल का संपादक बताता था।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार, उक्त मकान में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। लोगों का कहना था कि मकान में लगातार बाहरी लोगों की आवाजाही बनी रहती थी, जिससे क्षेत्र में असहज स्थिति उत्पन्न हो रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा कुछ दिनों से निगरानी की जा रही थी। पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस को मकान के अलग-अलग कमरों में कई युवक-युवतियां मिले। जांच के दौरान एक नाबालिग युवती के मिलने से मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने मौके से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है।
इस संबंध में डीएसपी कृष्णा चंद्राकर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से 500 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से जोड़ों को कमरा उपलब्ध कराता था। साथ ही बाहरी युवतियों को लाकर अवैध गतिविधियां संचालित किए जाने की भी आशंका है। मामले में पोक्सो एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल विस्तृत जांच जारी है।
पत्रकारिता की साख पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और संवेदनशील पेशे की आड़ में किए जा रहे दुरुपयोग को उजागर किया है। ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि उन सैकड़ों ईमानदार पत्रकारों की छवि को भी आघात पहुंचाते हैं, जो निष्ठा और साहस के साथ समाज और लोकतंत्र के हित में कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इस पहचान का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे पेशे की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
कवर्धा। शहर के मजगांव रोड स्थित एक मकान में पुलिस दबिश के दौरान कथित रूप से देह व्यापार संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मकान मालिक अमिताभ नामदेव को हिरासत में लिया है, जो स्वयं को एक पत्रकार एवं न्यूज़ पोर्टल का संपादक बताता था।
स्थानीय रहवासियों के अनुसार, उक्त मकान में लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। लोगों का कहना था कि मकान में लगातार बाहरी लोगों की आवाजाही बनी रहती थी, जिससे क्षेत्र में असहज स्थिति उत्पन्न हो रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस द्वारा कुछ दिनों से निगरानी की जा रही थी। पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस को मकान के अलग-अलग कमरों में कई युवक-युवतियां मिले। जांच के दौरान एक नाबालिग युवती के मिलने से मामला और गंभीर हो गया। पुलिस ने मौके से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की है।
इस संबंध में डीएसपी कृष्णा चंद्राकर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से 500 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से जोड़ों को कमरा उपलब्ध कराता था। साथ ही बाहरी युवतियों को लाकर अवैध गतिविधियां संचालित किए जाने की भी आशंका है। मामले में पोक्सो एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल विस्तृत जांच जारी है।
पत्रकारिता की साख पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पत्रकारिता जैसे जिम्मेदार और संवेदनशील पेशे की आड़ में किए जा रहे दुरुपयोग को उजागर किया है। ऐसे कृत्य न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि उन सैकड़ों ईमानदार पत्रकारों की छवि को भी आघात पहुंचाते हैं, जो निष्ठा और साहस के साथ समाज और लोकतंत्र के हित में कार्य कर रहे हैं।
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इस पहचान का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो यह पूरे पेशे की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जांच निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।




