नामदेव समाज की छवि धूमिल करने वाले फर्जी अध्यक्ष का एक और काला कारनामा बेनकाब

कवर्धा। नामदेव समाज की प्रतिष्ठा और आस्था को ठेस पहुंचाने वाले तथाकथित व फर्जी अध्यक्ष अभिताभ नामदेव का एक और गंभीर कृत्य सामने आया है।
पहले ही उसके निजी तीन मंजिला मकान में अनैतिक गतिविधियों के संचालन का मामला उजागर हो चुका है, जिस पर पुलिस कार्रवाई के बाद उसकी वास्तविकता समाज और प्रशासन के सामने आ चुकी है।
अब एक बार फिर उसने समाज की मर्यादाओं को तार-तार करते हुए पवित्र धार्मिक स्थल को भी अपवित्र करने का कार्य किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नामदेव समाज सामाजिक भवन सह मंदिर प्रांगण, जहां संत शिरोमणि नामदेव जी महाराज की प्रतिमा स्थापित है, उसी पवित्र परिसर में स्वयंभू एवं फर्जी पदाधिकारियों द्वारा शराबखोरी एवं अनैतिक गतिविधियां की गईं। यह कृत्य न केवल धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है, बल्कि पूरे नामदेव समाज के सम्मान और संस्कारों का घोर अपमान भी है।
इस घटना से आक्रोशित समाजजनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि—
“हम नामदेव हैं, हमारे आराध्य संत शिरोमणि नामदेव जी महाराज का अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। मंदिर प्रांगण को शराबखोरी और अनैतिक कृत्यों का अड्डा बनाना समाज के मूल्यों पर हमला है।”
मामले की गंभीरता को देखते हुए समाज द्वारा तत्काल प्रांतीय पदाधिकारियों को अवगत कराया गया। आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद फर्जी अध्यक्ष अभिताभ नामदेव एवं अन्य फर्जी पदाधिकारियों के अवैध कब्जे से मंदिर प्रांगण सह सामाजिक भवन को मुक्त कराने का निर्णय लिया गया।
अखिल भारतीय नामदेव क्षत्रिय महासभा, इकाई कबीरधाम ने समाज की गरिमा, पवित्रता और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सामाजिक भवन में ताला लगाए जाने का निर्णय लिया है, ताकि आगे किसी भी प्रकार की असामाजिक अथवा अनैतिक गतिविधि की पुनरावृत्ति न हो।
बताया जा रहा है कि मंदिर प्रांगण में शराबखोरी एवं अनैतिक कृत्यों के आरोप जिन फर्जी पदाधिकारियों पर लगे हैं, उनमें प्रमुख रूप से
अभिताभ नामदेव, अशोक नामदेव, कैलाश नामदेव एवं हेमंत नामदेव के नाम सामने आए हैं।
समाज ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति समाज और धार्मिक स्थलों की गरिमा से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।




