Blog

  • स्वतंत्रता दिवस 2025: लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐलान – “भारत न्यूक्लियर धमकी से डरने वाला नहीं, खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा”; सुनिए, उन्होंने और क्या कहा

    स्वतंत्रता दिवस 2025: लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐलान – “भारत न्यूक्लियर धमकी से डरने वाला नहीं, खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा”; सुनिए, उन्होंने और क्या कहा

    नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के 79वें वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने 12वें ध्वजारोहण के साथ इतिहास रचते हुए देश को संबोधित किया। सात दशक से अधिक समय में देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, और जल अधिकारों से जुड़े अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री का यह भाषण तीखा, दृढ़ और स्पष्ट संदेश देने वाला रहा।

    ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र – “दुश्मन को कल्पना से परे सजा”

    अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारतीय सेना के साहस और शौर्य की सराहना की। उन्होंने बताया कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वाले आतंकियों को सेना ने “मिट्टी में मिला दिया”।

    22 जुलाई के बाद सेना को मिली खुली छूट के तहत भारतीय जवान सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती में घुसकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर लौटे। “कई दशकों में ऐसा ऑपरेशन नहीं हुआ था। पाकिस्तान आज भी उस तबाही से उबर नहीं पा रहा है,” प्रधानमंत्री ने कहा।

    न्यूक्लियर धमकी पर सख्त चेतावनी – “न्यू नॉर्मल स्थापित कर दिया”

    प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दी जाने वाली परमाणु हथियारों की धमकियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा – भारत ने तय कर लिया है कि न्यूक्लियर की धमकियों को अब सहा नहीं जाएगा। न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे समय से चलता आया है, लेकिन अब यह नहीं चलेगा। आगे भी अगर दुश्मनों ने यह कोशिश की, तो हमारी सेना ही तय करेगी कि क्या जवाब देना है — और हम अमल में लाकर रहेंगे।

    सिंधु नदी समझौते पर हमला – “खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा”

    पीएम मोदी ने सिंधु जल संधि को एकतरफा और अन्यायपूर्ण करार दिया। उनका कहना था कि सात दशकों से इस समझौते ने भारतीय किसानों को अकल्पनीय नुकसान पहुंचाया है। भारत से निकलने वाली नदियों का पानी दुश्मनों के खेतों को सींच रहा है, जबकि हमारे किसान प्यासे हैं। यह स्वीकार्य नहीं है। खून और पानी, एक साथ नहीं बहेगा।

    आत्मनिर्भर भारत – राष्ट्र की ताकत का आधार

    प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत को देश के सामर्थ्य और आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल आयात-निर्यात या मुद्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की शक्ति और स्वाभिमान की कसौटी है।

    उन्होंने याद दिलाया कि गुलामी के काल ने भारत को निर्भर बना दिया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद किसानों और मेहनतकशों ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया। जब आत्मनिर्भरता खत्म होती है, तो सामर्थ्य भी क्षीण हो जाता है। आत्मनिर्भर राष्ट्र ही सम्मान के साथ जी सकता है।

    रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी का असर

    ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं का प्रमाण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा – अगर हम आत्मनिर्भर न होते, तो ऑपरेशन सिंदूर इतनी तेज गति से संभव नहीं होता। मेड इन इंडिया हथियारों और उपकरणों के कारण सेना को दुश्मन पर तुरंत प्रहार करने में सफलता मिली।

  • स्वतंत्रता दिवस 2025: रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फहराया तिरंगा, ले रहे हैं परेड की सलामी, देखें Live..

    स्वतंत्रता दिवस 2025: रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फहराया तिरंगा, ले रहे हैं परेड की सलामी, देखें Live..

    रायपुर। आज देशभर में स्वतंत्रता दिवस का उत्सव हर्ष और गर्व के साथ मनाया गया। राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। इस दौरान पूरा मैदान देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान से गूंज उठा।

    समारोह में मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को 79वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर हमें हमारे वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को स्मरण करने का दिन है। हमें एकजुट होकर ‘विकसित छत्तीसगढ़’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।”

    मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद सशस्त्र बलों की टुकड़ियों ने भव्य परेड का प्रदर्शन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने देशभक्ति गीतों, नृत्यों और नाटिकाओं के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

  • सांसद संतोष पाण्डेय स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के मुख्य समारोह में करेंगे ध्वाजारोहण

    सांसद संतोष पाण्डेय स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के मुख्य समारोह में करेंगे ध्वाजारोहण

    कवर्धा। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त वर्ष 2025 का जिला स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन कवर्धा के स्थानीय आचार्य पंथ श्री गृंधमुनि नाम साहेब शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैदान पर किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस की तैयारी पूरी कर ली गई है। सांसद संतोष पाण्डेय स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के मुख्य समारोह में ध्वाजारोहण करेंगे। श्री पाण्डेय परेड की सलामी लेंगें और जनता के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। मुख्य समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।
    प्रतिवर्ष भांति इस वर्ष भी स्वतत्रंता दिवस 15 अगस्त को गरिमामय तरीके से आयोजित होगा। जिला मुख्यालय में आयोजित मुख्य समारोह प्रातः 9 बजे आरंभ होगा। जिला स्तर पर मुख्य अतिथि के द्वारा ध्वजारोहण किया जाएगा।

    पुलिस और नगर सैनिकों की टुकड़ियों द्वारा सलामी दी जाएगी। मुख्य अतिथि द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जारी जनता के नाम संदेश का वाचन किया जाएगा। परेड की सलामी 11 टुकड़ियों द्वारा दी जाएगी जिसमें 17 वीं वाहिनी, जिला पुलिस बल पुरूष-महिला, नगर सेना, फारेस्ट गार्ड, एनसीसी सिनियर बालक, बालिका पीजी कॉलेज, एनसीसी बालक, बालिका स्वामी करपात्री स्कूल, एनसीसी स्वामी आत्मानंद स्कूल और जिला गाईड टीम के स्काउड गाईड के दल होगें। स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त के अवसर पर कबीरधाम जिले के 06 अलग-अलग शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राओं द्वारा देश भक्ति एवं छत्तीसगढ की कला संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी। इस वर्ष रक्षित निरीक्षक महेश्वर सिंह परेड का प्रतिनिधित्व करेंगे। द्वितीय कमांडर एसआई त्रिलोक प्रधान होंगे।

  • दो विभागों पर नई पदस्थापना: राज्य प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार, आदेश जारी

    दो विभागों पर नई पदस्थापना: राज्य प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार, आदेश जारी

    रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने दो अधिकारियों को नए विभागों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अरुण कुमार मरकाम को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के साथ ग्रामोद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं, राज्य प्रशासनिक सेवा के श्रीकांत वर्मा को खनिज साधन विभाग के साथ गृह तथा जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

     

     

    https://shatabditimes.page/wp-content/uploads/2025/08/202500266001-1-2521634.pdf

     

  • उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी बधाई, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित — छत्तीसगढ़ पुलिस के साहस को मिला राष्ट्रीय गौरव

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी बधाई, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित — छत्तीसगढ़ पुलिस के साहस को मिला राष्ट्रीय गौरव

    रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्वारा देश के उन पुलिस अफसरों और जवानों को वीरता पदक से सम्मानित किया जाता है, जिन्होंने अपने कर्तव्य पथ पर अदम्य साहस और बहादुरी का परिचय दिया हो। इस बार छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का अवसर है, जब 25 पुलिस अफसरों और जवानों का नाम वीरता पुरुस्कार, प्रेसिडेंट पुलिस पुरुस्कार और सरहानीय सेवा पदक के लिए चयनित हुआ है।  इनमें तीन ऐसे वीर सपूत भी हैं, जिन्होंने साहसिक कार्रवाई में अपने प्राणों की आहुति दी है और उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

    सम्मानित होने वालों में हिमांशु गुप्ता (डीजी जेल), ध्रुव गुप्ता (आईजी), प्रशांत कुमार ठाकुर (आईपीएस), श्वेता राजमणि (कमांडेंट), रवि कुमार कुर्रे (एसपी), कौशल्या भट्ट (इंस्पेक्टर), रोहित कुमार झा (इंस्पेक्टर), कमलेश कुमार मिश्रा (इंस्पेक्टर),  डालसिंह नामदेव (प्लाटून कमांडर), दिलीप कुमार सिन्हा (कंपनी कमांडर) और सुशील कुमार बरुवा (एएसआई) शामिल हैं। इसके अलावा  सुनील शर्मा (आईपीएस), संजीव कुमार मदिले (सब-इंस्पेक्टर), मड़कम, मड़कम, मड़कम, बरसे हूंगा, रोशन गुप्ता (सिपाही),  रामू राम नाग (एएसआई), कुंजाम जोग (सिपाही) और वनजाम भीमा (सिपाही), सूरज कुमार मरकाम (सिपाही), मांडवी सन्नू (सिपाही), करौद सिंह (कंपनी कमांडर), और पुरुषोत्तम देवांगन (सिपाही) को भी वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सभी चयनित अफसरों और जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि हमारे जांबाज देश के सर्वोच्च स्तर पर सम्मान पा रहे हैं। वीरगति को प्राप्त जवानों की शहादत अमर है, उनकी बहादुरी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।

  • Independence Day Special: छत्तीसगढ का मंगल पाण्डे लश्कर हनुमान सिंह

    Independence Day Special: छत्तीसगढ का मंगल पाण्डे लश्कर हनुमान सिंह

    Independence Day Special: 1857 के विद्रोह को कई नामों से जाना जाता है, जिनमें भारतीय विद्रोह, सिपाही विद्रोह, 1857 का महान विद्रोह, भारतीय विद्रोह और भारतीय स्वतंत्रता का पहला युद्ध शामिल है। 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध तक, ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले लिया था। सन 1757 में प्लासी की की लड़ाई के सौ साल बाद, अन्यायी और दमनकारी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ गुस्से ने एक विद्रोह का रूप ले लिया, जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। जहां ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे सिपाही विद्रोह कहा, वहीं भारतीय इतिहासकारों ने इसे 1857 का विद्रोह या भारतीय स्वतंत्रता का पहला संग्राम नाम दिया। 1857 के विद्रोह से पहले अठारहवीं शताब्दी के अंत से देश के विभिन्न हिस्सों में अशांति की एक श्रृंखला शुरू हो गई थी।

    छत्तीसगढ़ की माटी में कई वीर सपूतों ने जन्म लिया है. यहां के वीरों ने आजादी की लड़ाई के लिए अपने खून की नदियां तक बहाई हैं. इसकी गवाही शहर की कई इमारतें और सड़कें दे रहीं हैं. इसी में से एक है राजधानी रायपुर के बीचों बीच स्थित पुलिस परेड ग्राउंड। छत्तीसगढ़ में भी भारत की तरह बहुत से जगह अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज बुलंद हुए थे, जिसमें बहुत से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भाग लिया था, बहुत से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी अमूल्य योगदान देश की आजादी में दिए है जिनको भुला पाना हमारे लिए नामुमकिन है, इनमें से एक थे ठाकुर हनुमान सिंह (Hanuman singh from chhattisgarh) इनके सेवाभाव और समर्पण को हम सब का नमन इन्ही लोगों के कारण ही हम सब आज स्वतंत्र जीवन व्यतीत कर रहे हैं इन स्वतंत्रता सेनानियों की हम हमेशा आभारी रहेंगे।

    ठाकुर हनुमान सिंह के जन्म और मृत्यु के सम्बन्ध में कोई भी प्रामाणिक जानकारी नहीं मिलती किंतु हनुमान सिंह सम्बन्ध में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के समक्ष प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार वे बैसवाड़ा के राजपूत थे और वर्ष 1858  ई. में उनकी आयु 35 वर्ष थी। अर्थात् उनका जन्म वर्ष 1823 ई. माना जा सकता है।

     नागपुर का अस्थाई सैनिक दल जो रायपुर में स्थित था, उसकी तीसरी टुकड़ी में वीर हनुमान सिंह मैगजीन लश्कर के पद पर नियुक्त थे। लेफ्टिनेंट स्मिथ ने वीर हनुमान सिंह की कद काठी का विवरण निम्नानुसार दिया था। वह सुगठित कद का साफ और गोल चेहरे वाला बड़ी आंखें ऊंचा मस्तक छोटी गर्दन बड़ी और रोबदार मूछ वाला था तेज आवाज में बोलता था लेकिन शांत प्रकृति का था और चलते समय नीची निगाह रखता था और बैसवारे का रहने वाला था।

    कैप्टन सिडवेल के नेतृत्व में नागपुर से 100 सैनिकों की अंग्रेजी पल्टन को छत्तीसगढ़ में विद्रोह दबाने के लिए रायपुर भेजा गया था। इसी पल्टन में बैसवारे के वीर हनुमान सिंह मैगजीन लश्कर के रूप में शामिल थे। छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के महानायक पहाड़ी अंचल सोनाखान के जमींदर वीर नारायण सिंह को 10 दिसंबर 1857 को खुलेआम रायपुर के प्रमुख चौराहे पर फांसी दिया गया। वीर और छत्तीसगढ़ अंचल में महाविद्रोह को दबाने की चेष्टा अंग्रेज हुकूमत ने की थी।

    अंग्रेजों ने यह मान लिया था कि अब छत्तीसगढ़ अंचल में विद्रोह नहीं होगा लेकिन उन्हें यह अंदाज नहीं था कि क्रांति की ज्वाला उनके अपने सैन्य शिविर में ही धधक रही है। वीर नारायण सिंह की शहादत पर वीर हनुमान सिंह का खून खौल उठा और बदला लेने के लिए ही उन्होंने 18 जनवरी 1858 की रात अपने दो साथियों की मदद से कैप्टन सिडवेल को तलवार से 9 वार करके मौत की नींद सुला दिया था।

    सिडवेल को मारने के बाद वीर हनुमान सिंह ने सैन्य शिविर में घूम घूम कर बदला लेने का ऐलान किया और भारतीय सिपाहियों को विद्रोह में शामिल होने के लिए खुले रुप में साथ देने के लिए ललकारा लेकिन कोई दूसरा सिपाही उनकी जैसी हिम्मत नहीं जुटा पाया। सिडवेल की हत्या के बाद अंग्रेजी सेना के शिविर में हड़कंप मच गया। अंग्रेजी सेना ने हनुमान सिंह का साथ देने वाले दोनों सिपाहियों को पकड़ लिया लेकिन वीर हनुमान सिंह साथियों का साथ ना मिलने पर छत्तीसगढ़ अंचल के पहाड़ी जंगलों में छिप गए।

    रायपुर में उस समय फौजी छावनी थी जिसे तीसरी रेगुलर रेजीमेंटश् का नाम दिया गया था। ठाकुर हनुमान सिंह इसी फौज में मैग्जीन लश्कर के पद पर नियुक्त थे। सन् 1857 में उनकी आयु 35 वर्ष की थी। विदेशी हुकूमत के प्रति घृणा और गुस्सा था। रायपुर में तृतीय रेजीमेंट का फौजी अफसर था सार्जेंट मेजर सिडवेल। दिनांक 18 जनवरी 1858 को रात्रि 7:30 बजे हनुमान सिंह अपने साथ दो सैनिकों को लेकर देशी पैदल सेना की थर्ड रेजीमेण्ट के सार्जेण्ट मेजर सिडवेल उस समय अपने कक्ष में अकेले बैठे आराम कर रहे थे। हनुमान सिंह कमरे में निर्भीकतापूर्वक घुस गए तथा तलवार से सिडवेल पर घातक प्रहार किये और उनकी हत्या कर दी।

    हनुमान सिंह के साथ तोपखाने के सिपाही और कुछ अन्य सिपाही भी आये। उन्हीं को लेकर वह आयुधशाला की ओर बढ़े और उसकी रक्षा में नियुक्त हवलदार से चाबी छीन ली। बन्दूको में कारतूस भरे। दुर्भाग्यवश फौज के सभी सिपाही उसके आवाहन पर आगे नहीं आये। इसी बीच सिडवेल की हत्या का समाचार पूरी छावनी में फैल चुका था। लेफ्टिनेन्ट रैवट और लेफ्टिनेन्ट सी.एच.एच. लूसी स्थिति पर काबू पाने के लिये प्रयत्न करने लगे। हनुमान सिंह और उसके साथियों को चारों ओर से घेर लिया गया।

    इसके बाद वह छावनी पहुंचे। उन्होंने अन्य सिपाहियों को भी इस विद्रोह में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया। सभी सिपाहियों ने उनका साथ नहीं दिया। सिडबेल की हत्या का समाचार फैल चुका था और अंग्रेज अधिकारी सतर्क हो गए। लेफ्टिनेन्ट रैवट और लेफ्टिनेन्ट सी.एच.एच. लूसी स्थिति पर काबू पाने के लिये प्रयत्न करने लगे। हनुमान सिंह और उसके साथियों को चारों ओर से घेर लिया गया।

    हनुमान सिंह और उनके साथी 6-7 घंटे तक अंग्रेजों का डटकर मुकाबला करते रहे। इन 17 शहीदों में सभी जाति और धर्म के लोग थे, जिनके नाम हैं:- बल्ली दुबे (सिपाही), लल्ला सिंह (सिपाही), बुद्धु (सिपाही),पन्नालाल (सिपाही), शिव गोविंद (सिपाही) और देवीदीन (सिपाही), मातादीन (सिपाही), ठाकुर सिंह (सिपाही), अकबर हुसैन (सिपाही), दुर्गाप्रसाद (सिपाही), नाजर मोहम्मद (सिपाही), परमानंद (सिपाही), शोभाराम (सिपाही), गाजी खान (हवलदार), अब्दुल हयात (गोलंदाज), मुल्लू (गोलंदाज), शिवरी नारायण (गोलंदाज) मौका देखकर हनुमान सिंह भाग निकले लेकिन उनके 17 साथी अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए। इन पर मुकदमा चलाया गया और मृत्युदण्ड दिया गया 22 जनवरी, 1858 को सभी सिपाहियों की उपस्थिति में इन्हें फाँसी पर लटका दिया गया।

    सिडवेल की हत्या के बाद भी वीर हनुमान सिंह का अंग्रेजों से बदला लेने का जज्बा कम नहीं हुआ। 2 दिन बाद 20 जनवरी 1858 की आधी रात को वीर हनुमान सिंह तलवार लेकर अकेले ही शेर की मांद में शेर के शिकार का जज्बा रखते हुए रायपुर के डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट चार्ल्स इलियट की हत्या के इरादे से उसके बंगले में घुसे और इलियट जिस कमरे में सो रहे थे, उसका दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया लेकिन दरवाजे के मजबूत होने से प्रयास असफल रहा। इसके बाद अपनी खून की प्यासी तलवार के साथ वीर हनुमान सिंह छत्तीसगढ़ के जंगलों और पहाड़ों में गुम हो गए। उसके बाद उनका कोई भी पता नहीं चला। चार्ल्स इलियट के आदेश पर ही वीर नारायण सिंह को रायपुर के चौराहे पर तोपों से उड़ा दिया गया था। इसीलिए वीर हनुमान सिंह इलियट को भी मार डालना चाहते थे, लेकिन उनके मजबूत इरादों पर एलियट के बंगले के मजबूत दरवाजों ने पानी फेर दिया।

    अंग्रेज हुकूमत ने उनको पकड़ने के लिए हजारों जासूसों और गुप्तचरों का जाल बिछाया। रुपए 500 का इनाम भी घोषित किया (यह आज के 5 लाख रुपए से ज्यादा ही है) लेकिन अंग्रेज सेना वीर हनुमान सिंह को पकड़ने में कभी भी कामयाब नहीं हो सकी। बैसवारे के महानायक राना बेनी माधव बक्श सिंह की तरह ही वीर हनुमान सिंह भी अंग्रेजों के हत्थे नहीं चढ़े। राना बेनी माधव की तरह बाकी का जीवन उन्होंने जंगलों-पहाड़ों में ही गुजार कर जीवन लीला पूरी की। रायपुर के डिप्टी कमिश्नर लेफ्टिनेंट चार्ल्स इलियट के साथ उस रात बंगले में ही सोए हुए लेफ्टिनेंट स्मिथ ने उस रात के भयानक मंजर के बारे में लिखा भी-“यदि उस रात हम लोग जगाए ना गए होते तो लेफ्टिनेंट इलियट और मैं तो सोए सोए ही काट डाले गए होते और बंगले के अंदर अन्य निवासियों का भी यही हाल हुआ होता।”

    Independence Day Special: छत्तीसगढ कामंगल पाण्डे” 

    हनुमान सिंह भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिनको (chhattisgarh’s mangal pandey)  ‘छत्तीसगढ का मंगल पाण्डे’ कहा जाता है। 18 जनवरी 1858 को उन्होने सार्जेंट मेजर सिडवेल की हत्या कर दी थी जो रायपुर के तृतीय रेजीमेंट का फौजी अफसर था।

    कैप्टन स्मिथ के बयान से पता चलता है कि हनुमान सिंह ने छावनी में विद्रोह के दो दिन बाद ही 20 जनवरी, 1858 की रात डिप्टी कमिश्नर के बंगले पर भी हमला करने की कोशिश की थी। उस समय बंगले में क्षेत्र के कई प्रमुख वरिष्ठ अधिकारी सो रहे थे। इन अधिकारियों की सुरक्षा के लिए नियुक्त कैप्टन स्मिथ के ठीक समय पर जाग जाने से हनुमान सिंह को यहाँ से भागना पड़ा। अंग्रेज सरकार ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 500 रुपए के नगद पुरस्कार की घोषणा की थी, पर गिरफ्तार नहीं किया जा सका। हनुमान सिंह के फरार होने की इस घटना के बाद उनका कोई विवरण प्राप्त नहीं होता। कैप्टन स्मिथ के अनुसार जिस प्रकार हनुमान सिंह ने डिप्टी कमिश्नर के बंगले पर साहसपूर्ण आक्रमण किया, यदि उसे अपने उद्देश्य में सफलता मिल जाती तो निश्चय ही अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारियों का इस शहर से सफाया हो जाता।

    Independence Day Special: रायपुर का पुलिस परेड ग्राउंड थी अंग्रेजी सेना की छावनी:

    छत्तीसगढ़ की राजधानी मे स्थित ऐतिहासिक पुलिस परेड मैदान आजादी की लड़ाई के लिए विख्यात है। इसी मैदान में छत्तीसगढ़ में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की लड़ाई लड़ी गई। इतिहासकार डा. रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अंग्रेज 1854 में पहुंचे। पुलिस परेड ग्राउंड को अंग्रेजी सेना की छावनी बनाया गया था। सैकड़ों अंग्रेजी सेना घुड़सवार, गनमैन समेत अन्य सैनिकों के दल रहा करते थे। तब छत्तीसगढ़ के क्रांतिकारियों ने 1857 में अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ बिंगुल फूंक दिया। इसी मैदान में 18 जनवरी 1858 को हनुमान सिंह अपने 17 साथियों के साथ अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए प्लानिंग तैयार की। जैसे ही अंग्रेज अधिकारियों को देखते ही खूनी हुंकार भरी।

    Independence Day Special: छत्तीसगढ़ में 1857 के विद्रोह की विफलता का कारण:

    भारतीय की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत सबसे पहले मेरठ से हुई थी, बाद में यह भारत के अनेकों हिस्सों में फैल गई लेकिन उस समय संचार की एक बड़ी समस्या थी, इसलिए यह क्रांति की विफलता का एक मुख्य कारण है। कोई खास नेता नहीं था, केंद्रीय नेतृत्व का अभाव भी एक कारण था और पूरे भारत में इसका व्यापक प्रसार नहीं हो पाना भी एक कारण था।

    चूंकि भारत अंग्रेजों का गुलाम बन गया था इसलिए उनके पास उनसे लड़ने के लिए उतना पैसा और हथियार भी नहीं थे। हालाँकि अंग्रेजों के पास बहुत उन्नत प्रकार के हथियार थे और वित्त भी अच्छा था। विद्रोहियों में योजना का अभाव था। वीर हनुमान सिंह छत्तीसगढ़ में सन 1857 की क्रांति के अग्रणी नायकों में गिने-माने जाते हैं। इतिहासकार मानते हैं कि अगर अंग्रेजी सेना के भारतीय सिपाहियों ने साथ दिया होता तो वीर हनुमान सिंह की बहादुरी से छत्तीसगढ़ अंचल में एक बार फिर क्रांति की ज्वाला भड़क उठती। अंग्रेजों को छत्तीसगढ़ छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता।

    1857 की क्रांति के इस गुमनाम योद्धा ने छत्तीसगढ़ अंचल में अकेले ही क्रांति की लौ जलाकर अपना और बैसवारे का नाम इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया। समय रहते समाज और सरकार की ओर से वीर हनुमान सिंह के इतिहास को ढूंढने का उद्यम किया जाता, तो आज वह अपने बैसवारे में ही गुमनाम न होते। होना तो यह चाहिए था कि 18 जनवरी (अंग्रेजी सैन्य अफसर सिडवेल की हत्या की तारीख) को उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ अंचल में शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता।

    (लेखक: धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क संचालनालय, रायपुर)

  • जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में फर्जी नियुक्ति का खुलासा, 29 कर्मचारी बर्खास्त

    जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में फर्जी नियुक्ति का खुलासा, 29 कर्मचारी बर्खास्त

    बिलासपुर। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, बिलासपुर में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में बड़ा कदम उठाते हुए 29 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। यह निर्णय बैंक की स्टाफ कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

    बर्खास्त कर्मचारियों में 1 शाखा प्रबंधक, 4 सहायक लेखापाल, 8 पर्यवेक्षक, 6 लिपिक सह कंप्यूटर ऑपरेटर और 10 समिति प्रबंधक शामिल हैं।

    मामले की शुरुआत तब हुई जब भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई। जांच में 29 नियुक्तियां फर्जी पाई गईं। प्रारंभिक कार्रवाई में कर्मचारियों को पद से हटाया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत बैंक को विभागीय जांच पूरी करने के निर्देश दिए और बर्खास्तगी पर अस्थायी रोक लगा दी।

    सीईओ ने इस मामले में चार वरिष्ठ शाखा प्रबंधकों की जांच टीम गठित की। टीम ने निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें व्यक्तिगत सुनवाई के बाद आरोपों की पुष्टि हुई। इसके आधार पर स्टाफ कमेटी ने 29 कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।

    कर्मचारियों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिससे बैंक का निर्णय बरकरार रहा।

  • ऑपरेशन सिंदूर की सफलता एवं सेना के जवानों के सम्मान में पंडरिया विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में निकाली गई विधानसभा स्तरीय तिरंगा यात्रा

    ऑपरेशन सिंदूर की सफलता एवं सेना के जवानों के सम्मान में पंडरिया विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में निकाली गई विधानसभा स्तरीय तिरंगा यात्रा

    कवर्धा। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान में आज देशभर में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता एवं हमारे सेना के जवानों व स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में विधानसभा स्तरीय तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस अवसर पर पंडरिया विधानसभा में भी विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में कुण्डा मंडल में भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं क्षेत्रवासियों द्वारा विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें विधायक भावना बोहरा और सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रवासियों को हर घर तिरंगा अभियान में शामिल होने का आग्रह किया।

    कबीरधाम जिला भाजपा अध्यक्ष राजेन्द्र चंद्रवंशी जी ने कहा कि हर घर तिरंगा’ अभियान केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी जड़ों, संस्कृति और स्वतंत्रता के मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास है। यह अभियान हमें एकजुट होकर एक मजबूत, समृद्ध और गौरवशाली भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरित कर देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देता है और नागरिकों को स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों की याद दिलाता है।

    तिरंगा यात्रा

    इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने कहा कि तिरंगा हमारा गर्व, गौरव और अभिमान है। इस तिरंगे की रक्षा एवं देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए असंख्य राष्ट्रभक्तों, सेनानियों एवं वीर योद्धाओ ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। हर घर तिरंगा यात्रा उन्हीं असंख्य राष्ट्रभक्तों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और राष्ट्रप्रेम के पुनर्जागरण का समय है। ऑपरेशन सिंदूर में हमारे सेना के वीर जवानों ने जिस प्रकार पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, उनके पोषित आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया और विश्व को अपनी आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सजगता व प्रतिबद्धता का परिचय दिया उसके सम्मान में यह तिरंगा यात्रा निकाली गई है।

    भावना बोहरा ने कहा कि तिरंगा हमारा गौरव, हमारी एकता, और हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक है। हर घर तिरंगा अभियान, जिसकी शुरुआत हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर की थी, एक ऐसा जन आंदोलन है, जो देश के हर नागरिक को राष्ट्रीय ध्वज से जोड़ता है। इस अभियान का उद्देश्य है कि 13 से 15 अगस्त के बीच देश का हर घर तिरंगे से सुशोभित हो। यह केवल एक झंडा फहराने की बात नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति की भावना को हर दिल तक पहुँचाने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का संकल्प है। हमारा तिरंगा केसरिया, सफेद, और हरा रंग, और बीच में अशोक चक्र है जो हमारी विविधता में एकता, हमारे बलिदानों, और हमारे सपनों का प्रतीक है। केसरिया रंग साहस और बलिदान को दर्शाता है, सफेद रंग शांति और सत्य को, और हरा रंग समृद्धि और विकास को। अशोक चक्र हमें निरंतर प्रगति की प्रेरणा देता है। इस अभियान ने न केवल देशभक्ति को बढ़ावा दिया है, बल्कि खादी और हथकरघा उद्योग से जुड़े कारीगरों को रोजगार भी प्रदान किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    तिरंगा यात्रा

    उन्होंने आगे कहा कि आज देशभर में स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, और विभिन्न संगठनों द्वारा तिरंगा यात्राएँ निकाली जा रही हैं, जो युवाओं और नागरिकों में देशप्रेम की भावना को प्रज्वलित करती हैं। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों के साथ इस यात्रा के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया जा रहा है तो वहीं हमारे सेना के वीर जवानों तथा देश को आज़ादी दिलाने वाले सेनानियों एवं महान विभूतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जा रही है। इस यात्रा में न केवल युवा, महिला, बुजुर्ग, सामाजिक संगठन एवं हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं। ये यात्राएँ हमें याद दिलाती हैं कि हमारा तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की गाथा, हमारे शहीदों के बलिदान और हमारे एकजुट भारत का प्रतीक है। मैं पंडरिया विधानसभा सहित पूरे प्रदेश की जनता से आग्रह करती हूं कि हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ें और अपने घरों, प्रतिष्ठानों में तिरंगा ध्वज फहराकर देशभक्ति की इस यात्रा में सहभागी बनें और अपने देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएँ। यह हमारा देश है, और इसका गौरव हमारी एकता और प्रेम में है।

    तिरंगा यात्रा में पंडरिया विधानसभा के समस्त पदाधिकारी, मोर्चा व प्रकोष्ठ के पदाधिकारी कार्यकर्ता, मंडल, शक्ति केंद्र व बूथ के प्रभारी, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

     

  • कवर्धा में BJP की भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजे देशभक्ति के नारे

    कवर्धा में BJP की भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजे देशभक्ति के नारे

    कवर्धा। “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत बुधवार को BJP कार्यकर्ताओं ने शहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली, जिसने पूरे माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। यात्रा की शुरुआत शहर के अम्बेडकर चौक से हुई, जहां भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

    तिरंगा यात्रा अम्बेडकर चौक से निकलकर वीर स्तम्भ चौक, एकता चौक, ऋषभ देव चौक, मुख्य बाजार की सड़क होते हुए गुरु नानक देव चौक पहुंची और फिर वहीं से वापस अम्बेडकर चौक आकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान आगे-आगे लगे ध्वनि विस्तारक यंत्रों से देशभक्ति गीत बज रहे थे, जबकि पीछे-पीछे भाजपाई “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के गगनभेदी नारे लगा रहे थे। पूरा शहर तिरंगे की शान में डूबा नजर आया, और हर चेहरे पर देश के प्रति गर्व और उत्साह साफ झलक रहा था।

    इस मौके पर भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अशोक साहू ने कहा, “हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, यह आजादी का अमृत काल है। अनगिनत वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। यह समय उन्हें याद करने और उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प लेने का है।” उन्होंने कहा कि आज पूरा देश एक तिरंगे के नीचे एकजुट है, और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

    तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की धर्मपत्नी रश्मि शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, भाजपा जिला महामंत्री संतोष पटेल, क्रांति गुप्ता, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, शहर मंडल अध्यक्ष सतविंदर पाहुजा, देवकुमारी चंद्रवंशी, सविता ठाकुर, नीतू शर्मा, अजीत चंद्रवंशी, पिंटू दोषी, पन्ना चंद्रवंशी, राजेंद्र सलूजा, मनहरण कौशिक, संजय मिश्रा, राजू श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और आम नागरिक मौजूद रहे।

  • कवर्धा के पूर्व विधायक अशोक साहू को बड़ा दायित्व, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर जिले भर में उत्साह

    कवर्धा के पूर्व विधायक अशोक साहू को बड़ा दायित्व, भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर जिले भर में उत्साह

    कवर्धा। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की सहमति से, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की है। नई सूची में कबीरधाम जिले के कवर्धा से पूर्व विधायक अशोक साहू को भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

    पूर्व विधायक अशोक साहू के इस दायित्व पर चयन को लेकर प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से पिछड़ा वर्ग मोर्चा की गतिविधियों को और गति मिलेगी।

    भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र चंद्रवंशी, पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामकुमार भट्ट, गोपाल साहू, रुपेश जैन, दुर्गेश ठाकुर, सनत साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, मंडल अध्यक्ष सतविंदर पाहुजा और नीतू शर्मा ने पूर्व विधायक अशोक साहू को इस नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी है।