कवर्धा। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में जनजातीय संस्कृति और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का अभियान लगातार सशक्त होता जा रहा है। इसी क्रम में कुकदूर से लगे सुदूर वनांचल ग्राम दमगढ़ में 50 से अधिक आदिवासी भाई-बहनों ने स्वेच्छा से घर वापसी कर अपने मूल धर्म में पुनः प्रवेश किया। इस आयोजन के साथ ही बीते कुछ महीनों में पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में घर वापसी करने वाले आदिवासी नागरिकों की संख्या 165 से अधिक हो गई है।
कार्यक्रम में पंडरिया विधायक भावना बोहरा स्वयं उपस्थित रहीं। उन्होंने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ सभी का स्वागत किया। आयोजन को जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक चेतना और आदिवासी स्वाभिमान की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जा रहा है।

वनांचल क्षेत्रों में लंबे समय से चल रही कथित प्रलोभन और भ्रम फैलाकर धर्मांतरण की कोशिशों के बीच यह घर वापसी कार्यक्रम एक सशक्त संदेश के रूप में सामने आया है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आदिवासी समाज सनातन परंपरा की आत्मा है। उनकी प्रकृति-पूजा, लोक देवताओं की आराधना और सामूहिक जीवन शैली ही भारत की मूल पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घर वापसी कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा का अभियान है।

उन्होंने यह भी कहा कि सेवा के नाम पर भ्रम फैलाने और संस्कृति को कमजोर करने के प्रयास स्वीकार्य नहीं होंगे।
विधायक बोहरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आदिवासी समाज के लिए चल रही योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पीएम जनमन योजना, सड़क, आवास, बिजली, पानी और सम्मानजनक जीवन की सुविधाएं ही सच्ची सेवा हैं।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए बाइक एम्बुलेंस का शुभारंभ किया गया। साथ ही बैगा आदिवासी सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा भी की गई, जिससे स्थानीय समाज को सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए स्थायी मंच मिल सकेगा।

यह आयोजन पंडरिया विधानसभा में जनजातीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के अभियान को नई गति देने वाला माना जा रहा है।