अंकिता शर्मा, कवर्धा । छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने प्रदेश के गन्ना किसानों की समस्याओं, पर्यटन विकास, आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्वीकृति, उर्वरकों की उपलब्धता तथा समर्थन मूल्य पर खरीदी गई दलहन फसलों के भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया।
सदन का ध्यानाकर्षण करते हुए विधायक भावना बोहरा ने कहा कि कबीरधाम, बेमेतरा, बालोद, सरगुजा सहित प्रदेश के कई जिलों में हजारों किसान गन्ना उत्पादन पर निर्भर हैं, लेकिन उन्हें अपनी उपज का भुगतान समय पर नहीं मिल पा रहा है। किसानों को भुगतान के लिए 8 से 9 माह तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे वे आर्थिक संकट, कर्ज और अतिरिक्त ब्याज के बोझ से प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि निजी गुड़ निर्माण इकाइयों द्वारा अधिक कीमत मिलने के कारण किसान वहां गन्ना बेचने को मजबूर हैं, जिससे सहकारी शक्कर कारखानों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रहा है। उन्होंने गन्ना किसानों के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) लागू करने, भुगतान की समय-सीमा तय करने, राज्य स्तरीय रिवॉल्विंग फंड स्थापित करने, ड्रिप सिंचाई आधारित योजनाएं शुरू करने तथा किसान उन्नति योजना में गन्ना फसल को शामिल करने की मांग की।
विधायक बोहरा ने पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए लागू नीतियों और विकास कार्यों की जानकारी भी सदन में मांगी। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने लिखित उत्तर में बताया कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत पर्यटन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में 79 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 68 को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन” प्रारंभ किया है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास कार्यों की स्वीकृति को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति के लिए कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है, हालांकि प्रस्तावों के शीघ्र निराकरण के प्रयास किए जाते हैं। कोण्डागांव जिले से विकास कार्यों में विलंब की एक शिकायत प्राप्त हुई है, जिसकी जांच प्रक्रियाधीन है।
खरीफ वर्ष 2026 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पर सरकार ने बताया कि राज्य में यूरिया की मांग 7.25 लाख टन के मुकाबले 5.25 लाख टन, डीएपी की मांग 3 लाख टन के मुकाबले 1.49 लाख टन तथा एनपीके की मांग 2.50 लाख टन के मुकाबले 2.07 लाख टन की आपूर्ति निर्धारित की गई है। उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी के मामलों में कार्रवाई करते हुए 163 प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण और एफआईआर जैसी कार्रवाई शामिल है।
समर्थन मूल्य पर दलहन खरीदी और किसानों को भुगतान की स्थिति पर सरकार ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2025-26 में चना की खरीदी नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से की गई। योजना के तहत उपज गोदाम में जमा होने और वेयरहाउस रिसीप्ट जारी होने के बाद किसानों के बैंक खातों में तीन कार्य दिवस के भीतर डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने का प्रावधान है।
विधानसभा में उठाए गए इन मुद्दों के माध्यम से विधायक भावना बोहरा ने किसानों, आदिवासी क्षेत्रों और पर्यटन विकास से जुड़े विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए प्रभावी एवं दीर्घकालिक समाधान की मांग की।