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May 28, 2026 1:17 am

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छत्तीसगढ़ सरकार का नया नियम: धान बेचना है समर्थन मूल्य पर? पहले इस पोर्टल पर नाम दर्ज कराएं, वरना बोनस भी जाएगा हाथ से, पढ़ें पूरी खबर

छत्तीसगढ़ सरकार का नया नियम: धान बेचना है समर्थन मूल्य पर? पहले इस पोर्टल पर नाम दर्ज कराएं, वरना बोनस भी जाएगा हाथ से, पढ़ें पूरी खबर
छत्तीसगढ़ सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब समर्थन
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Ankita Sharma

रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए बड़ा बदलाव कर दिया है। इस बार समर्थन मूल्य पर धान बेचने का अधिकार सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनका नाम एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकृत होगा। रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर किसान न केवल धान नहीं बेच पाएंगे, बल्कि बोनस और कई योजनाओं से मिलने वाली सहायता राशि भी खो बैठेंगे।

एकीकृत किसान पोर्टल से जुड़ रहा है एग्रीस्टैक

पहले किसानों का पंजीकरण एकीकृत किसान पोर्टल पर होता था। अब इसे एग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। कृषि विभाग ने निर्देश दिए हैं कि पुराने रजिस्ट्रेशन को आगे बढ़ाने या संशोधन करने से पहले हर किसान का एग्रीस्टैक पर नया पंजीकरण अनिवार्य है। इसका मतलब है कि पिछले साल पंजीकरण कराने वाले किसानों को भी इस बार फिर से नाम दर्ज कराना होगा।

पंजीकरण कहां और कैसे करें

किसान अपना पंजीकरण नजदीकी लेम्प्स (LAMPs) या ग्राहक सेवा केंद्र (CSC) में निःशुल्क करवा सकते हैं। प्रशासन ने किसानों को चेतावनी दी है कि अंतिम समय का इंतजार न करें, वरना बिक्री के समय परेशानी हो सकती है।

योजनाओं का लाभ भी सिर्फ पंजीकृत किसानों को

कृषि विभाग का कहना है कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले किसान ही कृषक उन्नति योजना का लाभ पा सकेंगे। इस योजना के तहत सरकार, किसानों को समर्थन मूल्य और बाजार भाव के बीच का अंतर भरपाई के रूप में देती है।

अगर किसान धान की जगह कोई दूसरी खरीफ फसल लेते हैं तो उन्हें ₹11,000 प्रति एकड़ की मदद मिलेगी। वहीं दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य (कोदो, कुटकी, रागी) या कपास की खेती करने पर ₹10,000 प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी।

लेकिन यह लाभ तभी मिलेगा जब किसान का पंजीकरण एग्रीस्टैक पोर्टल पर हुआ हो और उसकी फसल का रकबा गिरदावरी में सत्यापित हो चुका हो।

बिना पंजीकरण — न बिक्री, न बोनस

कृषि विभाग ने साफ किया है कि जिन किसानों का नाम एग्रीस्टैक पोर्टल में नहीं होगा, वे न तो समर्थन मूल्य पर धान बेच पाएंगे और न ही बोनस की रकम पा सकेंगे। सरकार का साफ संदेश है — “समर्थन मूल्य और बोनस चाहिए तो समय पर रजिस्ट्रेशन कराएं।”

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