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May 28, 2026 2:20 am

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जामगांव एम में केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, महिलाओं से लेकर संग्राहकों तक सबको मिला स्थायी रोजगार

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Ankita Sharma


रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन एवं राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा जामगांव एम, पाटन में विकसित की गई केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई अब ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है। लगभग 111 एकड़ में फैली यह इकाई ग्रामीणों से वनोपज एवं औषधीय वन उत्पाद खरीदकर उनका संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन कर रही है। यहां तैयार होने वाले उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांड’ के नाम से पूरे राज्य में लोकप्रिय हो रहे हैं।

महिला समूहों को मिला स्थायी काम, बढ़ी आमदनी
इकाई क्रमांक-01 में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार देकर आंवला, बेल और जामुन जैसे वनोपजों से जूस, कैंडी, लच्छा, बेल मुरब्बा, शरबत और जामुन पल्प जैसे उत्पाद पूरी शुद्धता के साथ तैयार किए जा रहे हैं। बीते एक वर्ष में इस इकाई ने 44 लाख रुपये के उत्पादों का निर्माण और विक्रय किया है। तैयार उत्पादों की बिक्री एनडब्ल्यूएफपी मार्ट और संजीवनी स्टोर्स के माध्यम से की जा रही है।

20 हजार मीट्रिक टन क्षमता का विशाल वेयरहाउस
इकाई क्रमांक-02 में 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले चार बड़े गोदाम स्थापित किए गए हैं, जिनमें कोदो, कुटकी, रागी, हर्रा, चिरायता, पलास फूल और साल बीज जैसी वनोपज का सुरक्षित भंडारण किया गया है। इन वनोपजों की बिक्री संघ मुख्यालय रायपुर द्वारा निविदा के माध्यम से की जा रही है। दोनों इकाइयों के संचालन से अब तक 5,200 से अधिक मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ है।

पीपीपी मॉडल पर हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट से नए रोजगार
जामगांव एम में 6 एकड़ में स्थापित हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट का संचालन छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ और स्फेयर बायोटेक कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन मंत्री केदार कश्यप ने वर्ष 2025 में इसका लोकार्पण किया था। यहां गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मुसली, जंगली हल्दी, अश्वगंधा, गुड़मार व शतावरी जैसी औषधीय वनोपज से अर्क निकालकर आयुर्वेदिक और वेलनेस उत्पादों में उपयोग किया जा रहा है।

संग्राहकों को मिलेगा उचित मूल्य, बढ़ेगी आय
स्फेयर बायोटेक ग्रामीण संग्राहकों से वनोपज का पूर्ण क्रय करेगी, जिससे उन्हें उचित मूल्य और नियमित आय सुनिश्चित होगी। इस परियोजना से वनोपज की मूल्यवृद्धि को नई गति मिली है और ग्रामीणों, महिलाओं व संग्राहकों के लिए रोजगार व आय के स्थायी अवसर तैयार हुए हैं।

यह केन्द्रीय प्रसंस्करण इकाई अब ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सफल मॉडल बन चुकी है।

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