कवर्धा। जिले की सांस्कृतिक पहचान बन चुका भोरमदेव महोत्सव इस बार विवादों में घिरता नजर आ रहा है। स्थानीय कलाकारों का आरोप है कि उन्हें महोत्सव में प्रस्तुति देने के लिए मात्र 5-5 हजार रुपये मानदेय देने की बात कही जा रही है। साथ ही यह चर्चा भी तेज है कि इस बार महोत्सव को केवल एक ही दिन में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे कलाकारों और सांस्कृतिक जगत में नाराजगी बढ़ने लगी है।
दरअसल भोरमदेव महोत्सव जिले का एक ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। हर साल यहां प्रदेश के साथ-साथ स्थानीय कलाकार भी अपनी लोककला, पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति देते हैं। इस महोत्सव के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच मिलता रहा है और बड़ी संख्या में दर्शक भी इस आयोजन का आनंद लेने पहुंचते हैं।
लेकिन इस बार आयोजन को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय कलाकारों का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम के लिए केवल 5-5 हजार रुपये मानदेय देने की बात कही जा रही है, जो इतने बड़े सांस्कृतिक आयोजन के लिहाज से काफी कम है। कलाकारों का आरोप है कि आयोजकों की ओर से बजट की कमी का हवाला दिया जा रहा है।
इसके अलावा यह भी चर्चा है कि इस बार भोरमदेव महोत्सव को एक ही दिन में समाप्त करने की तैयारी चल रही है, जबकि पहले यह महोत्सव तीन दिनों तक आयोजित होता रहा है। ऐसे में कलाकारों और सांस्कृतिक प्रेमियों का मानना है कि यदि आयोजन की अवधि कम की जाती है तो इससे महोत्सव की गरिमा और महत्व दोनों प्रभावित हो सकते हैं।