रायपुर। भारत मंडपम में आयोजित 44वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के दौरान आज छत्तीसगढ़ की लोक-सांस्कृतिक विरासत ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक संध्या में राज्य के लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दीप प्रज्वलन कर की। इससे पूर्व उन्होंने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया और हस्तशिल्प, कला-कृतियों व उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित उत्पादों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की राजधानी में “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” की गूंज सुनना हर छत्तीसगढ़वासी के लिए गर्व का क्षण है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रायपुर में देश के पहले डिजिटल जनजातीय संग्रहालय के लोकार्पण को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कला, परंपरा और प्रकृति के अनूठे संगम की भूमि है, जहाँ लोक-नृत्य, तीज-त्योहार और जनजातीय परंपराएँ आज भी जीवंत हैं।
सांस्कृतिक संध्या में गौरा-गौरी, भोजली, राउत नाचा, सुआ, पंथी, और करमा नृत्य की धमाकेदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुआ नृत्य की लयात्मकता, राउत नाचा की ऊर्जा, पंथी की आध्यात्मिक प्रस्तुति और करमा की मनभावन झांकी ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विविधता को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, सांसद कमलेश जांगड़े, सांसद भोजराज नाग, खादी बोर्ड अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, पर्यटन मंडल अध्यक्ष नीलू शर्मा, साहित्य अकादमी अध्यक्ष शशांक शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, सचिव रोहित यादव, तथा अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने न केवल छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय मंच पर दमकाया, बल्कि राज्य की कला, मिलेट्स, हस्तशिल्प और जनजातीय परंपराओं की अनूठी पहचान को भी मजबूत संदेश दिया।
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