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May 28, 2026 12:36 am

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BJP प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर मंथन अंतिम चरण में, तीन नए महामंत्री बनेंगे; महामंत्री पद के लिए नवीन मार्कंडेय और अखिलेश सोनी के नाम लगभग फाइनल

BJP प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर मंथन अंतिम चरण में, तीन नए महामंत्री बनेंगे; महामंत्री पद के लिए नवीन मार्कंडेय और अखिलेश सोनी के नाम लगभग फाइनल
छत्तीसगढ़ BJP की प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर अंतिम दौर का
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Ankita Sharma

रायपुर। छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर दिल्ली में संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में स्पष्ट कर दिया गया है कि इस बार प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय के साथ केवल तीन महामंत्रियों को जगह दी जाएगी। इससे पहले की कार्यकारिणी में चार महामंत्री थे।

सूत्रों के मुताबिक, तीन में से दो नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। अनुसूचित जाति वर्ग (SC) से पूर्व विधायक नवीन मार्कंडेय और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से अखिलेश सोनी के नामों पर लगभग सहमति बन गई है। तीसरे महामंत्री को लेकर विचार-विमर्श जारी है। सामान्य वर्ग से दो नामों एक दुर्ग और एक बिलासपुर के नेता की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन चूंकि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष किरण देव पहले से ही सामान्य वर्ग से हैं, ऐसे में संगठन में सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए इस वर्ग से महामंत्री न रखने का विचार बन रहा है। ऐसे में संभावना है कि तीसरा महामंत्री आदिवासी (ST) वर्ग से होगा।

दिल्ली में हुई बैठक में राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेशाध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय शामिल थे। बैठक रात देर तक चली और संगठन के ढांचे पर विस्तृत चर्चा हुई।

इस बार संगठन में पुराने चेहरों को नई जिम्मेदारियाँ दी जा रही हैं। वर्तमान महामंत्रियों में से जगदीश रामू रोहरा धमतरी के महापौर बन चुके हैं और संजय श्रीवास्तव को नान (नागरिक आपूर्ति निगम) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अन्य दो महामंत्री रामजी भारती और भरत वर्मा को उपाध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। इससे साफ है कि तीन नए चेहरों को महामंत्री पद की जिम्मेदारी दी जाएगी।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण देव को कार्यभार संभाले सात महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन मंडल और जिलों की कार्यकारिणियों के चलते अब तक प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका था। अब जब जिले स्तर पर नियुक्तियाँ पूरी हो गई हैं, तो प्रदेश स्तर पर नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज़ हो गई है।

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