अंकिता शर्मा, कवर्धा। छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के अंतिम दिन आज पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने प्रदेश एवं कबीरधाम जिले से जुड़े प्रमुख और जनहित से जुड़े विषयों के सन्दर्भ में प्रश्न पूछा। उन्होंने प्रदेश में सखी वन स्टॉप सेंटरों की कार्यप्रणाली एवं महिलाओं को प्रदत्त सहायता, आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित रेडी-टू-ईट पोषण आहार की गुणवत्ता एवं निगरानी, बाल संरक्षण योजनाओं एवं बाल सुरक्षा उपायों तथा कबीरधाम जिला अंतर्गत खाद्यान्न भंडारण क्षमता एवं गोदाम निर्माण के विषय में प्रश्न किया।
भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि राज्य में वर्तमान में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या कितनी है? विगत तीन वर्षों में सखी वन स्टॉप सेंटरों में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न एवं अन्य महिला हिंसा संबंधी कितने प्रकरण प्राप्त हुए तथा उनमें से कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया? विगत तीन वर्षों में सखी वन स्टॉप सेंटरों के माध्यम से कितनी महिलाओं को कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श, चिकित्सा सहायता एवं अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया गया है? जिसके लिखित उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री ने बताया की राज्य में वर्तमान में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 42 है। विगत तीन वर्षों में सखी वन स्टॉप सेंटरों में घरेलू हिंसा के 12359, दहेज प्रताड़ना के 87, यौन उत्पीड़न के 415 एवं अन्य महिला हिंसा संबंधी 8670 प्रकरण प्राप्त हुए तथा उनमें से घरेलू हिंसा के 10543, दहेज प्रताड़ना के 83, यौन उत्पीड़न के 386 एवं अन्य महिला हिंसा संबंधी 8531 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
विगत तीन वर्षों में सखी वन स्टॉप सेंटरों के माध्यम से 1484 महिलाओं को कानूनी सहायता, 10661 महिलाओं को मनोसामाजिक परामर्श, 1755 महिलाओं को चिकित्सा सहायता एवं 7330 महिलाओं को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया गया है।
भावना बोहरा ने प्रश्न पूछा कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने के अभियान के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किए जाने वाले रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण, क्रय एवं वितरण हेतु कुल कितनी राशि का बजट आबंटित एवं व्ययित किया गया है।
जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्रीजी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से वितरित किये जाने वाले रेडी टू ईट, मीठा शक्ति आहार एवं नमकीन पौष्टिक दलिया आदि के निर्माण, क्रय एवं वितरण हेतु 441,56,01,438 रूपये का आबंटन प्रदान किया गया था। जिसके विरूद्ध राशि 440,73,86,423 रूपये का व्यय किया गया है।
बाल संरक्षण योजनाओं एवं बाल सुरक्षा उपायों के विषय में भावना बोहरा ने प्रश्न किया कि राज्य में बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास, देखरेख एवं समग्र विकास हेतु वर्तमान में कौन-कौन सी योजनाएं एवं कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं? विगत तीन वर्षों में इन योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या कितनी है? राज्य में वर्तमान में संचालित बाल गृह, विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण, बाल देखरेख संस्थान, ओपन शेल्टर, आश्रय गृह तथा बाल संरक्षण समितियों की संख्या कितनी है? बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल यौन शोषण एवं अन्य प्रकार के बाल उत्पीड़न की रोकथाम, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास हेतु विगत तीन वर्षों में शासन द्वारा कौन-कौन से विशेष अभियान, जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रवर्तनात्मक कार्यवाही की गई है? जिसके लिखित उत्तर में विभागीय मंत्री ने बताया कि राज्य में बच्चों के संरक्षण, पुनर्वास, देखरेख एवं समग्र विकास हेतु वर्तमान में मिशन वात्सल्य योजना का संचालन किया जा रहा है।
राज्य में कुल 109 बाल देखरेख संस्थाएं (बालगृह, खुला आश्रय गृह, विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण, सम्प्रेक्षण गृह, प्लेस ऑफ सेफ्टी एवं विशेष गृह) वर्तमान में संचालित हैं। कुल 33 जिला बाल संरक्षण समिति कार्यरत है। बाल तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह, बाल यौन शोषण एवं अन्य प्रकार के बाल उत्पीड़न की रोकथाम, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास हेतु विगत तीन वर्षों में स्ट्रीट सिचुवेशन वाले बच्चों की पहचान, बाल श्रम, अपशिष्ट संग्राहक एवं बाल भिक्षावृत्ति के प्रभावी रोकथाम हेतु अभियान, विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रम उन्मुलन सप्ताह का आयोजन, बच्चों द्वारा ड्रग्स एवं अन्य स्वापक औषधियों के प्रयोग की रोकथाम हेतु विशेष अभियान, बच्चों के अवैध तस्करी की रोकथाम हेतु विशेष अभियान, बाल विवाह की रोकथाम हेतु विशेष जागरूकता अभियान चलाए गये। उक्त अभियान के दौरान रेस्क्यू किए गये बालकों को बालक कल्याण समिति के आदेशानुसार पुनर्स्थापन/पुनर्वासित किया गया है।
भावना बोहरा ने कबीरधाम जिले के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रश्न पूछा कि कबीरधाम जिले में वर्तमान में खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम एवं अन्य संबंधित एजेंसियों के अधीन संचालित खाद्यान्न गोदामों की संख्या, स्थानवार एवं उनकी स्वीकृत भंडारण क्षमता कितनी-कितनी है? क्या वर्तमान भंडारण क्षमता जिले की खाद्यान्न आवश्यकता एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अनुरूप पर्याप्त है? विगत तीन वर्षों में कबीरधाम जिले में नए खाद्य गोदाम, उपार्जन केंद्र गोदाम एवं खाद्य भवनों के निर्माण हेतु कितनी स्वीकृतियाँ प्रदान की गई हैं?
कबीरधाम जिले में वर्तमान में कितने खाद्य गोदाम जर्जर अथवा मरम्मत योग्य स्थिति में हैं? क्या शासन द्वारा कबीरधाम जिले के ग्रामीण, वनांचल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में खाद्यान्न भंडारण क्षमता बढ़ाने हेतु नए गोदामों के निर्माण अथवा अतिरिक्त भंडारण क्षमता सृजित करने का कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है? यदि हाँ,
तो उसका विवरण क्या है? जिसके लिखित उत्तर में खाद्य मंत्री जी ने बताया कि कबीरधाम जिले में खाद्यान्न भण्डारण हेतु राज्य भण्डार गृह निगम के कुल 37 गोदाम है जिनकी भण्डारण क्षमता 75487 टन है। खाद्यान्न भण्डारण हेतु नागरिक आपूर्ति निगम के स्वयं के गोदाम नहीं है। जिले में वर्तमान खाद्यान्न भण्डारण क्षमता सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत जिले में खाद्यान्न की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त है। कबीरधाम जिले में वर्तमान में राज्य भण्डार गृह निगम के खाद्यान्न गोदाम जर्जर नहीं है। उचित मूल्य दुकान सह गोदाम के कुल 86 भवन जर्जर है। विभागीय बजट में राशि का प्रावधान होने पर जर्जर उचित मूल्य दुकान सह गोदाम का मरम्मत कराया जा सकेगा।