अंकिता शर्मा, कवर्धा। जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर में पिछले पांच दिनों से केरल से आए विद्वानों द्वारा विशेष तांत्रिक पूजा-अनुष्ठान किए जाने की चर्चा है। इस दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं और छत्तीसगढ़ के विद्वानों को पूजा से दूर रखे जाने की बात सामने आने के बाद विभिन्न तरह के सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह धार्मिक अनुष्ठान सार्वजनिक हित और मंदिर की परंपरा के अनुरूप है, तो इसमें स्थानीय विद्वानों और श्रद्धालुओं की सहभागिता क्यों नहीं सुनिश्चित की गई। इसे लेकर पारदर्शिता की मांग भी उठ रही है।
इधर, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि कहीं यह विशेष तांत्रिक पूजा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार अथवा राजनीतिक स्थिरता से जुड़ी किसी मान्यता के तहत तो नहीं कराई जा रही। हालांकि, इस संबंध में किसी भी सरकारी विभाग, मंदिर प्रबंधन या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान सामने नहीं आया है।