अंकिता शर्मा, कवर्धा। पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने रायपुर के ग्राम नकटी स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि सार्वजनिक उपयोग (चारागाह) की भूमि को विधायक एवं सांसद आवास निर्माण के लिए आवंटित किया जाता है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना की स्थिति पैदा कर सकता है।
जारी बयान में अकबर ने कहा कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा 10 मार्च 2011 को जारी निर्देश आज भी प्रभावी हैं। उक्त निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के 24 जनवरी 2011 के आदेश के पालन में जारी किए गए थे, जिनमें सभी कलेक्टरों एवं संभागायुक्तों को सार्वजनिक निस्तारी एवं उपयोग की भूमियों को चिन्हित कर सुरक्षित रखने तथा भविष्य में उन्हें किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवंटन हेतु प्रस्तावित नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।
अकबर ने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर कलेक्टर द्वारा आवास एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशों के तहत ग्राम नकटी की चारागाह भूमि को हाउसिंग बोर्ड के माध्यम से सांसदों एवं विधायकों के आवास निर्माण के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत माना जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अवमानना हुई है या नहीं, इसका निर्णय संबंधित न्यायालय ही करेगा, लेकिन प्रशासन को न्यायालय और शासन के पूर्व निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना चाहिए। अकबर ने कहा कि प्रमुख सचिव के निर्देश अभी भी प्रभावी हैं, इसके बावजूद चारागाह भूमि को खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने की तैयारी की जा रही है, जो आश्चर्यजनक और चिंताजनक है।

पूर्व मंत्री ने शासन एवं प्रशासन से इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करने और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण संबंधी नियमों एवं न्यायालयीन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।