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June 17, 2026 4:00 am

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नए सत्र की शुरुआत, लेकिन कबीरधाम के स्कूलों में शिक्षकों और सुविधाओं का संकट बरकरार; जर्जर भवन, खाली पद और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में

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Ankita Sharma

अंकिता शर्मा, कवर्धा। छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों की आमद शुरू हो चुकी है, लेकिन कबीरधाम जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति कई गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा कर रही है। शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर स्कूल भवन, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और पाठ्य सामग्री की अनुपलब्धता के बीच विद्यार्थियों को नए सत्र की पढ़ाई शुरू करनी पड़ रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में प्राथमिक से लेकर हाई एवं हायर सेकेंडरी स्तर तक कुल 1608 विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 65 विद्यालय भवन अति जर्जर स्थिति में हैं, जबकि 53 स्कूलों में बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 318 विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं और 63 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने के लिए किचन शेड का अभाव है।

नए शिक्षा सत्र के पहले दिन तक भी विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकी है। जिले के किसी भी विद्यालय में अभी तक गणवेश का वितरण नहीं हुआ है, वहीं प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पाठ्यपुस्तकें भी नहीं पहुंची हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है।

जिले में शिक्षकों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है। आंकड़ों के मुताबिक प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी स्तर तक 6391 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 3916 शिक्षक कार्यरत हैं। यानी जिले में 2475 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। वहीं स्कूलों के प्रशासनिक संचालन के लिए स्वीकृत 1606 प्राचार्य पदों में से 1434 पद भरे हुए हैं, जबकि 172 पद खाली हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पद और बुनियादी सुविधाओं की कमी विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता और भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकती है।

वहीं जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि शाला प्रवेश उत्सव की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रवेश अभियान एक माह तक चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में संसाधनों और सुविधाओं की कमी है, उसकी जानकारी शासन को भेज दी गई है तथा उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है।

नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही कबीरधाम जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि शासन और प्रशासन इन कमियों को दूर करने के लिए कितनी तेजी से कदम उठाते हैं, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जा सके।

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